The Heron's Fake Tears Fooled the Whole Pond | Panchatantra Story
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Hindi transcript
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पंचतंत्र की एक मजेदार कहानी है। एक आलसी बगुले और एक बुजुर्ग केकड़े की। बहुत समय पहले एक नदी में बहुत सारी मछलियां रहती थी। चमकती सी। उसी नदी के किनारे पेड़ों पर कई बगुले अपना बसेरा बनाकर रहते थे। गर्मी का मौसम धीरे-धीरे आने वाला था। नदी का पानी कम होने लगा। सारे बगुले उड़कर किसी दूसरी ठंडी नदी के पास रहने चले गए। उन्हीं बगुलों में एक बगुला उस नदी को छोड़कर कहीं नहीं गया।
वह बहुत आलसी था। बैठे-बठाए भोजन पाने का सपना देखता था। बाकी बगुलों के चले जाने के बाद उसे खाने पीने की दिक्कत होने लगी। एक दिन वह बगुला एक टीले पर बैठकर जोर-जोर से रोने लगा। उसकी रोने की आवाज नदी के सबसे बुजुर्ग केकड़े के कान में पड़ी। केकड़े ने पानी से बाहर निकल कर देखा। बगुला बहुत तेज रो रहा था। क्यों बगुले भाई? क्या हुआ?
इतनी तेज क्यों रो रहे हो आज? बगुले ने पहले तो कुछ बताने से साफ-साफ मना कर दिया था। केकड़े के बार-बार पूछने पर बगुले ने अपनी झूठी कहानी सुनानी शुरू की। कल रात मेरे पास इस नदी की जलदेवी आई थी। मामा जी मेरे। उन्होंने मुझसे कहा कि यह नदी जल्द ही पूरी तरह सूख जाएगी। मेरा क्या? मैं तो उड़कर कहीं भी आसानी से चला जाऊंगा। पर इस नदी की मछलियां और आप सब मेरे भाई-बहन जैसे हैं।
आप सबका अब क्या होगा? यही सोचकर मैं रात दिन रो रहा हूं। इतना कहकर बगुला फिर जोर-जोर से रोने लगा। आंखों में आंसू थे। नदी की सारी मछलियां धीरे-धीरे टीले के पास इकट्ठा होने लगी। बगुले भाई हम लोगों को बचाने का कोई रास्ता बताओ जल्दी। नहीं तो हम सब यहीं प्राण गवा देंगे। कुछ उपाय बताओ। बगुला कुछ देर सोच कर बोला कि उसके पास एक उपाय जरूर है।
मेरे पास एक उपाय है पर पता नहीं आपको पसंद आएगा या नहीं। बताओ बगुले भाई जल्दी बताओ हम सुनने को तैयार बैठे हैं। मैं एक-एक करके आप सबको अपनी पीठ पर बैठाकर ले जाऊंगा। पहाड़ी के पीछे एक बड़ी नदी है। वहीं छोड़ आऊंगा सबको। बुजुर्ग केकड़े ने बगुले की बात पर शंका जताते हुए कहा, "हम लोग तुम पर कैसे विश्वास करें बगुले भाई? यह बताओ।
क्या पता तुम बीच रास्ते में सबको मारकर खा जाओ। चुपके से। मामा जी, मैंने अब मछलियां खाना बिल्कुल छोड़ दिया है पूरी तरह। देखिए मैं दिनोंदिन इतना पतला होता जा रहा हूं। बस इसी कारण मैं मंत्र ले चुका हूं। लोग मुझे बगुला भगत भी कहने लगे हैं। मेरे जीवन के अब कुछ ही दिन बचे हैं मामा जी प्यारे। सोच रहा हूं कि अंत में कुछ परोपकार ही कर लूं।
अच्छा सा। नहीं तो बाद में भगवान के पास जाकर क्या जवाब दूंगा बताइए? बगुले की लाई चुपड़ी बातें सुनकर सभी मछलियों को विश्वास हो ही गया। बगुला भगत की जय हो। ले चलो हमें दूसरी बड़ी नदी में। इस तरह बगुला मछलियों को बहाने से पहाड़ी के पीछे ले जाने लगा। वहां पहुंचकर वह उन भोली मछलियों को चुपचाप अपना भोजन बना लेता था। देखते-देखते बगुले की सेहत में बहुत सुधार होने लगा।
वह तगड़ा हो गया। अब बगुला दिन के दो-तीन चक्कर भी आराम से लगा देता था। बगुले की बढ़ती सेहत को देखकर बुजुर्ग केकड़े को आशंका होने लगी। बगुला भगत आज मुझे भी उस दूसरी नदी छोड़ने ले चलो भाई। बगुले ने केकड़े को अपनी पीठ पर बैठाकर आसमान में उड़ान भरी। पहाड़ी के पीछे पहुंचने पर केकड़े ने नीचे की तरफ देखा। वहां नीचे जमीन पर हड्डियों का एक बड़ा ढेर लगा हुआ था।
यह सब हड्डियां किसकी है? बगुले भाई मुझे साफ-साफ बताओ तो। बगुले ने हंसते हुए अपनी पूरी सच्चाई केकड़े के सामने बता दी। मूर्ख मामा यहीं पर मैं तालाब की मछलियां लाकर खाता हूं हमेशा। आज तुम्हारा नंबर है मामा जी। अब तुम भी बच नहीं सकते। केकड़े ने बिना देरी किए अपने दोनों नुकीले पंजे आगे बढ़ाए। उसने बगुले की पतली गर्दन को बहुत कसकर पकड़ लिया था।
बगुले की उड़ान वहीं आसमान में अचानक थम कर रुक गई। बगुला धीरे-धीरे आकाश में दूर एक छोटी सी छाया बन गया। केकड़ा सकुशल वापस अपनी नदी की ओर लौट आया। धीरे-धीरे उसने नदी की सारी मछलियों को सारी सच्चाई कह सुनाई। मछलियों को अपने शत्रु पर भरोसा करने का बहुत पछतावा। यह कहानी हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है। ध्यान से सुनिए। अपने शत्रु पर कभी भी भरोसा करना बहुत हानिकारक हो सकता है।
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