Bandar Aur Sadhu | The Monkey and the Sage: Hindi Moral Story
About this video
Bandar Aur Sadhu is a monkey and sage story where Jackie's borrowed robes reveal the difference between appearance and character.
Jackie lives with a lively monkey troop in the old banyan tree of Krishna Vatika, yet he believes their life is beneath him. He watches respected sadhus speak below the branches and mistakes their clothing and calm posture for the source of that respect. After rejecting the friends who share food and protect one another, Jackie wraps himself in saffron cloth, adds wooden prayer beads, and sits beneath the tree pretending to be wise.
The disguise holds only until a visiting child raises a ripe banana. Jackie forgets his solemn pose, grabs the fruit, and exposes the restless monkey beneath the borrowed robes. The elder sadhu explains that clothing cannot create wisdom or good character. Embarrassed, Jackie runs back to the canopy, where his companions' honest words force him to face the real mistake: he treated his own identity and loyal friends as something small.
Bandar Aur Sadhu, meaning The Monkey and the Sage, is an animated Hindi moral story about self-acceptance, conduct, and blind imitation. Jackie apologizes, returns to his troop, and begins improving the qualities that truly deserve respect: kindness, honesty, gratitude, and the ability to share. The lesson reaches beyond appearance. We can learn from people we admire, but copying their surface without understanding their values changes nothing. Real growth begins when we accept who we are and choose better actions.
Chapters
0:00 Jackie Wants Respect
0:20 He Rejects His Troop
1:00 The Borrowed Robes
2:49 One Banana Breaks the Act
3:44 Jackie Faces His Mistake
5:10 Back With His Friends
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.088 कृष्णा वाटिका के पुराने बरगद पर जैकी बंदर रहता था, पर वह अपनी पहचान से बिल्कुल खुश नहीं था।
- 0:12.088 विशाल बरगद की फैली जड़ों के नीचे साधु-संत बैठते और आने वाले लोगों को प्रेम से प्रवचन सुनाते थे।
- 0:20.088 सुबह होते ही वाटिका में पक्षियों का मधुर कलरव गूँजता, ठंडी हवा चलती और श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती।
- 0:28.088 उसी पेड़ की ऊँची शाखाओं पर बंदरों का चंचल झुंड रहता, जो मिलकर फल बाँटता और दिन भर खेलता था।
- 0:36.088 पर जैकी अपने साथियों से दूर बैठकर नीचे मनुष्यों को देखता और मन ही मन उनकी प्रशंसा करता रहता था।
- 0:44.088 काश, मैं भी इंसान होता! तब लोग मेरा आदर करते और मुझे इस पेड़ पर उछलते हुए दिन नहीं बिताने पड़ते।
- 0:52.088 उसे लगता था कि साधुओं के कपड़े, शांत चाल और सम्मान भरी बातें ही मनुष्य होने की असली पहचान हैं।
- 1:00.088 उसके साथी उसे मीठे फल खाने और शाखाओं पर खेलने बुलाते, मगर जैकी हर बार मुँह फेरकर बैठ जाता।
- 1:08.088 जैकी, हमारे साथ चलो। झुंड में रहना, मिलकर खाना और एक-दूसरे की मदद करना ही हमारी ताकत है।
- 1:16.088 मुझे बंदरों जैसी यह जिंदगी पसंद नहीं। मैं तुम सबसे अलग हूँ और अब इंसानों की तरह सम्मान से रहूँगा।
- 1:23.046 बात बढ़ी तो जैकी ने साथियों से झगड़ा कर लिया, पेड़ की शाखा छोड़ी और अकेला वाटिका की राह पर निकल गया।
- 1:31.046 अगले दिन जैकी ने बरगद के नीचे बैठे साधुओं को ध्यान से देखा और उनकी हर छोटी-बड़ी मुद्रा याद की।
- 1:39.046 कोई आँखें मूँदकर ध्यान करता, कोई माला फेरता और कोई शांत स्वर में दया तथा सच्चाई की बातें समझाता था।
- 1:47.046 जैकी ने ज्ञान का अर्थ समझने के बजाय केवल उनका बाहरी रूप देखा और उसी की नकल करने का निश्चय किया।
- 1:55.046 उसने साधु जैसे गेरुए कपड़े पहने, कंधे पर कपड़ा डाला और गंभीर चेहरा बनाकर बरगद के नीचे आ बैठा।
- 2:03.046 वह कभी आँखें बंद करता, कभी गर्दन हिलाता और कभी बिना अर्थ समझे होंठों में कुछ बुदबुदाने लगता।
- 2:11.046 अब मैं बिल्कुल इंसान जैसा दिखता हूँ। थोड़ी देर में सब लोग मुझे भी समझदार साधु मानकर आदर देंगे।
- 2:17.921 कुछ देर बाद एक परिवार प्रवचन सुनने आया और छोटा बच्चा जैकी के पास बैठकर पका हुआ केला खाने लगा।
- 2:24.921 केले की मीठी सुगंध हवा में फैली तो जैकी की नजर बार-बार बच्चे के हाथ की ओर जाने लगी।
- 2:32.921 उसने साधु जैसी गंभीर मुद्रा बनाए रखने की कोशिश की, पर भीतर का लालच हर पल और तेज होता गया।
- 2:40.921 मैं अब इंसान हूँ, इसलिए केले की ओर नहीं देखूँगा। बस शांत बैठना है और अपने भेष को बचाए रखना है।
- 2:48.921 अगले ही क्षण बच्चे ने केले का बड़ा टुकड़ा उठाया और जैकी अपनी बनावटी गंभीरता पूरी तरह भूल गया।
- 2:56.921 वह झट से उछला, बच्चे के हाथ से केला छीना और सबके सामने बैठकर जल्दी-जल्दी उसे खाने लगा।
- 3:04.921 बच्चा घबरा गया और रोने लगा। आसपास बैठे लोग चौंक उठे, जबकि जैकी केले का अंतिम टुकड़ा निगल रहा था।
- 3:12.921 पास बैठे साधु ने उसकी हरकत देखी और समझ लिया कि कपड़ों के भीतर कोई ज्ञानी मनुष्य नहीं, शरारती बंदर है।
- 3:20.921 केवल गेरुए कपड़े पहन लेने से कोई साधु या इंसान नहीं बनता। अच्छे आचरण के बिना हर भेष अधूरा है।
- 3:28.921 साधु ने जैकी को कड़ी डाँट लगाई, उसकी शरारत की सजा दी और नकली गेरुए कपड़े उतारने लगे।
- 3:35.754 जैकी छूटकर भागा तो खींचतान में उसके गेरुए कपड़े फट गए और उसका बनाया हुआ सारा भेष खुल गया।
- 3:43.754 शर्मिंदा जैकी दौड़कर उसी बरगद पर चढ़ गया, जहाँ उसके पुराने साथी पूरी घटना देख चुके थे।
- 3:51.754 गए थे इंसान बनने! जैकी, केवल नकल से कोई नहीं बदलता; नकल करने के लिए भी अकल चाहिए।
- 3:59.754 साथियों की बात सुनकर जैकी का सिर झुक गया। उसे अपने फटे कपड़ों और छीने हुए केले पर बहुत लज्जा हुई।
- 4:07.754 वह सबसे ऊँची शाखा पर अकेला बैठा और पहली बार अपनी भूल को बिना किसी बहाने के समझने लगा।
- 4:15.754 उसे याद आया कि जिन बंदरों को वह बेकार कहता था, वे हमेशा उसके साथ फल बाँटते और संकट में मदद करते थे।
- 4:23.754 गलती मेरे बंदर होने में नहीं थी, गलती अपने साथियों और अपनी पहचान को छोटा समझने में थी।
- 4:29.754 अगली सुबह जैकी धीरे-धीरे नीचे उतरा। इस बार उसकी चाल में दिखावा नहीं, अपनी गलती मानने की सच्चाई थी।
- 4:37.754 मित्रों, मैंने घमंड में तुम्हें बुरा कहा और अकेला चला गया। अपनी नासमझी के लिए मैं सबसे क्षमा माँगता हूँ।
- 4:45.754 गलती समझ में आ जाए तो लौटने में देर नहीं होती। आओ जैकी, यह पेड़ और यह झुंड तुम्हारा भी है।
- 4:53.754 साथियों ने उसे फिर अपने बीच जगह दी और जैकी ने प्रेम से मिला फल सबके साथ बराबर बाँटकर खाया।
- 5:01.754 उस दिन से उसने किसी का बाहरी रूप देखकर वैसा बनने की इच्छा छोड़ दी और अपने अच्छे गुण सँवारने लगा।
- 5:09.754 जैकी की कहानी सिखाती है कि स्वयं से प्रेम करना चाहिए; दूसरों की अंधी नकल कभी नहीं करनी चाहिए।