अकबर बीरबल की दूध-पानी कथा: सबने एक लोटा क्या डाला?
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अकबर-बीरबल की दूध और पानी की कथा में बादशाह को विश्वास है कि उनकी प्रजा उन्हें धोखा नहीं देगी। बीरबल इसे परखने के लिए सबको रात में शाही बर्तन में एक-एक लोटा दूध डालने को कहते हैं। हर व्यक्ति सोचता है कि दूसरों के दूध में उसका पानी छिप जाएगा।
सुबह बर्तन का परिणाम पूरे राज्य की सोच सामने रख देता है। अकबर-बीरबल की इस हिंदी कहानी में व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक भरोसे की परीक्षा देखिए। किसी एक की छोटी बेईमानी मामूली लग सकती है, लेकिन सब वही करें तो मिलकर बनाया काम खोखला हो जाता है।
Chapters
0:00 The Emperor's Question
0:28 One Lota of Milk
0:46 The Night Procession
1:04 Dawn at the Cauldron
1:25 What Birbal Proved
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Hindi transcript
The narration as spoken, from the caption track uploaded with this video.
- 0:04.121 अकबर बीरबल की एक मजेदार कहानी, जब बीरबल ने प्रजा की नब्ज परखी।
- 0:09.121 मुगल सम्राट बादशाह अकबर का दरबार सजा हुआ था।
- 0:13.121 अकबर को विश्वास था कि उनकी प्रजा उन्हें बहुत प्रेम करती है।
- 0:17.121 बीरबल, हमारी प्रजा कितनी ईमानदार है, और हमें कितना प्यार करती है?
- 0:23.121 जहाँपनाह, हमारे राज्य में कोई पूर्ण रूप से ईमानदार नहीं है।
- 0:27.621 यदि आदेश हो, तो मैं यह बात साबित कर सकता हूँ, महाराज।
- 0:31.621 अकबर ने मुस्कुराते हुए बीरबल को साबित करने की अनुमति दी।
- 0:35.621 बीरबल ने राज्य में घोषणा करवा दी कि बादशाह एक भोज रखेंगे।
- 0:40.121 हर नागरिक को एक लोटा दूध महल के उपवन में रखे कड़ाहे में डालना था।
- 0:46.121 बीरबल ने उपवन के बीच विशाल कांसे का कड़ाहा रखवा दिया।
- 0:50.121 हर किसी ने सोचा कि बाकी सब दूध डालेंगे, मेरे एक लोटा पानी से क्या होगा।
- 0:56.121 रात के अंधेरे में, गाँव-गाँव से लोग लोटे लेकर महल की ओर बढ़े।
- 1:00.913 हर किसी ने चुपचाप अपने लोटे का पानी कड़ाहे में डाल दिया।
- 1:04.913 पूरी रात यही क्रम चलता रहा, कोई एक भी ईमानदार सामने नहीं आया।
- 1:10.913 सुबह-सुबह बादशाह अकबर और बीरबल कड़ाहे को देखने उपवन में पहुँचे।
- 1:16.913 अकबर कड़ाहे के पास झुके, और देखकर बिल्कुल चकित रह गए।
- 1:20.913 कड़ाहे में सिर्फ पानी ही पानी था, दूध की एक बूँद भी नहीं थी।
- 1:24.913 महाराज, यही है आपकी प्रजा की असली नब्ज और सच्चाई का दर्पण।
- 1:30.913 हर एक ने सोचा कि मेरे एक लोटे पानी से क्या फर्क पड़ेगा।
- 1:34.913 बीरबल, मानना पड़ेगा, तुम हमारी प्रजा को बहुत अच्छे से पहचानते हो।
- 1:39.871 यह कहानी सिखाती है कि विश्वास परखे बिना मत रखो।
- 1:43.871 यदि हर कोई सोचे कि उसकी एक बेईमानी से कुछ नहीं होगा, तो समाज खोखला हो जाता है।
- 1:49.871 यदि कथा अच्छी लगी हो, तो हमारे चैनल से जुड़े रहें।